रायपुर/बस्तर। बस्तर क्षेत्र, जो वर्षों तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा, अब तेजी से शांति, विकास और आजीविका सशक्तिकरण के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हाल के महीनों में लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों, आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं और आधारभूत ढांचा सुधारों ने यहां स्थायी विकास के लिए मजबूत नींव तैयार की है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन अब आदिवासियों की आजीविका, रोजगार, वन-उत्पादों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर विशेष फोकस कर रहे हैं।
नक्सल हिंसा में लगातार कमी आई है।कई प्रभावित गांवों में पहली बार सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं और इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंची है।सुरक्षा बलों के साथ-साथ प्रशासन भी गांवों में लगातार जनचौपाल, विकास शिविर और भरोसा बहाल कार्यक्रम चला रहा है।
बस्तर में आजीविका सुधार को लेकर कई नई योजनाएं लागू की जा रही हैं:वन धन समूहों को प्रशिक्षण व मार्केट एक्सेसलघु वनोपज (Tendu, Mahua, Chironji, Tamarind) का मूल्य संवर्धनमहिलाओं के लिए SHG आधारित रोजगार मॉडलकोदो-कुटकी, रागी जैसे मोटे अनाजों की ब्रांडिंगपर्यटन, हस्तशिल्प और वानिकी आधारित नए स्टार्टअप्स को बढ़ावासरकार की मंशा यह है कि आदिवासी युवा अब हथियार नहीं, बल्कि कौशल, शिक्षा और उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ें।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट्सस्कूलों में डिजिटल क्लासरूम और छात्रवृत्ति योजनाएंग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत तेज़ी से पाइपलाइन बिछाई जा रही हैइस बदलाव ने गांवों में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत की है।
विशेषज्ञों के अनुसार नक्सल गतिविधि में गिरावट के बाद: निजी निवेश बढ़ने की संभावनापर्यटन और संस्कृति पर आधारित , रोजगार के नए अवसर , युवाओं का मुख्यधारा की ओर झुकाव , प्रशासनिक सेवाओं की आसान पहुंच , शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधारबस्तर अब संघर्ष की पहचान से निकलकर स्थायी विकास का मॉडल बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार उन्हें ये भरोसा महसूस हो रहा है कि बस्तर न केवल बदलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य का सबसे तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र बन सकता है।नक्सलवाद की छाया मिटने के बाद बस्तर आज राहत, उम्मीद और प्रगति के नए चरण में प्रवेश कर चुका है।





