जिनेवा में रविवार को यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शांति योजना पर गहन चर्चा की गई। इस बैठक का मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक स्थायी और न्यायपूर्ण समझौता खोजने की कोशिश करना है।
यूक्रेन की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंद्राई येर्मक, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के प्रमुख सहायक, कर रहे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी बैठक में शामिल हुए, जो यूक्रेन-पश्चिम के साझेदार देशों की एकता का संकेत है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल, और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं।
अमेरिकी प्रस्ताव एक 28-पॉइंट फ्रेमवर्क है, जिसे कुछ यूरोपीय नेताओं ने रूस-पक्षपातपूर्ण कहा है। विशेष रूप से, योजना में यूक्रेन की सैन्य सीमाओं को कम करने, भूमि सौंपने और NATO में शामिल न होने जैसी मांगें हैं, जो कई सहयोगियों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, यूरोप के राष्ट्राध्यक्षों ने कहा है कि यह योजना तभी टिकाऊ हो सकती है जब इसे संशोधन और पुनर्लेखन की प्रक्रिया से गुारा जाए।
चर्चा के बाद यूक्रेन और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान बनाए रखने की सहमति दी। दोनों पक्षों ने कहा है कि वे यूरोपीय सहयोगियों की भागीदारी के साथ संयुक्त प्रस्तावों पर गहन काम जारी रखने को तैयार हैं। यूक्रेनी प्रतिनिधियों का कहना है कि बातचीत “बहुत रचनात्मक” रही और वे आशावादी हैं कि संवाद से निरंतर शांति की दिशा में प्रगति हो सकती है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि जिनेवा की बातचीत से रक्तपात बंद हो सकेगा और युद्ध की भाईचारे की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। वहीं, अमेरिकी दृष्टिकोण से यह पहल पश्चिमी सहयोगियों के साथ सामूहिक और बहुपक्षीय समाधान की ओर एक बड़ा राजनयिक कदम है।विशेषज्ञों का मानना है कि जिनेवा बैठक भविष्य में शांति वार्ता की एक महत्वपूर्ण आधारशिला हो सकती है — बशर्ते यूरोपीय देशों की मांगों को शामिल कर प्रस्ताव को और संतुलित बनाया जाए।


