जोहानिसबर्ग — 22 नवंबर, 2025 को दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 समिट के घोषणापत्र में भारत के एजेंडे के प्रमुख मुद्दे — यूक्रेन और फिलिस्तीन संघर्षों पर शांति का आह्वान और वैश्विक भूख (फूड सिक्योरिटी) की समस्या पर गंभीर चिंता — सामने आए हैंG20 नेताओं ने अपने निष्क्रिय एक साझा घोषणा पत्र में “जस्ट, कॉम्प्रिहेंसिव एवं स्थायी शांति” की प्रतिबद्धता जताई है — विशेष रूप से यूक्रेन और दक्षिण अफ्रीका की घोषणा में फिलिस्तीनी क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
घोषणापत्र में यह भी कहा गया है कि सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का सम्मान करें। इसके अलावा, आतंकवाद की भी “सभी रूपों में निंदा” की गई है, यह मानते हुए कि स्थिरता और समृद्धि तभी संभव है जब आतंकवाद-विरोधी वैश्विक एकता हो।घोषणापत्र में G20 ने यह स्वीकार किया है कि वैश्विक भूख अभी भी एक गंभीर समस्या है।
“मनुष्य के मौलिक अधिकारों” में भोजन तक पहुंच का अधिकार शामिल करते हुए, G20 ने यह दोहराया कि भूख से मुक्त दुनिया बनाना एक जरूरी लक्ष्य है।
इसके अलावा, G20 ने युद्धों और संघर्षों के कारण नागरिकों को भूख से पीड़ित होने की खतरा को लेकर चिंता जताई है। घोषणापत्र में स्पष्ट कहा गया है कि “इरादतन नागरिकों को खाद्य आपूर्ति से वंचित करना युद्ध का एक तरीका नहीं होना चाहिए।” G20 ने अत्यधिक खाद्य-मूल्य उतार-चढ़ाव और खाद्य महंगाई की चुनौतियों को स्वीकार किया है, जो निचले-आय वाले देशों में सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। उन्होंने ऐसे कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है जो खुली, गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार नीतियों के माध्यम से पोषक और पोषणयुक्त खाद्य प्रणालियों को मजबूत करें।
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भारत का एजेंडा G20 के व्यापक विवादित मुद्दों में एक संतुलनकारी दृष्टिकोण पेश करता दिखा — न केवल संघर्ष-क्षेत्रों में शांति की मांग, बल्कि विकासशील और कम-विकसित देशों की खाद्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना।विशेष रूप से, भारत G20 के मंच पर “वैश्विक दक्षिण” (Global South) की आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाने में सक्रिय रहा है, और यह घोषणापत्र इस दृष्टिकोण से प्रेरित लगता है।


