भारतीय शेयर बाजार में IPO का जबरदस्त बूम जारी है। पिछले 90 दिनों में IPO मार्केट ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने निवेशकों और विश्लेषकों दोनों को हैरान कर दिया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 61 आईपीओ लॉन्च हुए और इनके जरिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये (900,000,00,00,000 रुपये) जुटाए गए। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनियों में कैपिटल जुटाने की बेताबी और निवेशकों की उत्सुकता किस ऊंचाई पर पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण गिनाते हैं—मजबूत आर्थिक संकेतक, विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार और कंपनियों के प्रति निवेशकों का बढ़ता भरोसा। घरेलू बाजार भी लगातार नए उच्च स्तर छू रहा है, जिससे कंपनियां इस सकारात्मक माहौल का फायदा उठाने के लिए IPO लेकर आ रही हैं।
इस तिमाही में टेक्नोलॉजी, फिनटेक, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और रिटेल सेक्टर के IPO सबसे ज्यादा सफल रहे। कई कंपनियों को सौ गुना से भी अधिक सब्सक्रिप्शन मिला, जिससे लिस्टिंग के दिन तगड़ा प्रीमियम देखने को मिला।हालांकि IPO का बूम उत्साह बढ़ाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हर लिस्टिंग निवेशकों के लिए फायदेमंद नहीं रही।लगभग 35% IPO लिस्टिंग के बाद गिरावट में चले गए।20% कंपनियां लिस्टिंग गेन तो दे गईं, लेकिन बाद में शेयर कीमतें लगातार फिसलती रहीं।
सिर्फ लगभग 30% IPO ही लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न दे पाए।
इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ, बिजनेस मॉडल, वैल्यूएशन, और रिस्क फैक्टर को अच्छी तरह समझना जरूरी है।हाल के ट्रेंड बताते हैं कि IPO मार्केट में पैसा जरूर बह रहा है, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा है। ओवर-सब्सक्रिप्शन से भ्रमित हुए बिना, ठोस विश्लेषण और लॉन्ग-टर्म विज़न के साथ ही निवेश करना समझदारी होगी IPO मार्केट में हलचल जारी है—लेकिन हर बढ़ता आंकड़ा चमक नहीं होता। समझदारी से कदम बढ़ाना ही इस दौर में सबसे बड़ी सुरक्षा है।


