ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ‘ममलेश्वर लोक’ विकास योजना को जनता और साधु-संतों के तीव्र विरोध के बाद आखिरकार वापस ले लिया गया है। लंबे समय से स्थानीय निवासियों, पुजारियों और धार्मिक संगठनों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा था कि यह परियोजना मंदिर परिसर और प्राचीन धार्मिक स्वरूप को प्रभावित कर सकती है। लगातार बढ़ते विरोध, ज्ञापन और शांतिपूर्ण आंदोलनों के चलते सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और योजना को रद्द करने की घोषणा की।
सूत्रों के अनुसार, साधु-संतों ने स्पष्ट कहा था कि ममलेश्वर महादेव मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता ने भी आशंका जताई कि विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक धरोहरों को नुकसान पहुंच सकता है। क्षेत्र में कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रशासन और धर्मगुरुओं के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद योजना को वापस लेने का फैसला लिया गया।
सरकार ने कहा है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी ऐसी परियोजना पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा, जिससे सांस्कृतिक विरासत को खतरा हो। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि भविष्य में किसी भी विकास योजना के लिए स्थानीय समुदाय और धर्मगुरुओं से व्यापक परामर्श लिया जाएगा।
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‘ममलेश्वर लोक’ योजना की वापसी के बाद ओंकारेश्वर में संत समाज और स्थानीय लोगों ने राहत जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक धरोहरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जनता की एकजुटता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


