राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी ग्रीन तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से अब सिर्फ 7 घंटे में ब्लैक टेराकोटा तैयार किया जा सकेगा। पारंपरिक टेराकोटा निर्माण में कई दिनों का समय लगता है और इसमें भारी मात्रा में ईंधन जलाने से धुआं और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। नई तकनीक इन दोनों समस्याओं का समाधान पेश करती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह तकनीक ऊर्जा-कुशल है और इसे इस्तेमाल करने पर धुआं बिल्कुल नहीं निकलता, जिससे वायु गुणवत्ता पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके साथ ही, निर्माण प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन भी लगभग नगण्य हो जाता है। यह तकनीक खासकर ग्रामीण कुम्हार समुदाय और टेराकोटा उद्योग के लिए वरदान साबित हो सकती है।
नई प्रणाली में उन्नत हीटिंग तकनीक और नियंत्रित तापमान प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है। इससे न सिर्फ उत्पाद जल्दी तैयार होते हैं, बल्कि उनकी मजबूती और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। पारंपरिक भट्टी की तुलना में यह तकनीक 70% तक ऊर्जा की बचत कर सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि NIT राउरकेला की यह पहल भारत में क्लीन टेक्नोलॉजी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी। इससे छोटे उद्योगों को कम लागत में अधिक और बेहतर उत्पाद बनाने में मदद मिलेगी।
शोध टीम अब इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में उद्योगों और सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि आने वाले वर्षों में टेराकोटा उद्योग का चेहरा पूरी तरह बदल सके।





