दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने चार डॉक्टरों को हिरासत में लिया है, जिन पर संदिग्धों को मेडिकल सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार, इन डॉक्टरों की गतिविधियों पर पिछले कई दिनों से निगरानी रखी जा रही थी और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर उनके संभावित कनेक्शन सामने आए।
जांच टीम का मानना है कि यह गिरफ्तारी मामले में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि आरोप है कि पकड़े गए डॉक्टरों ने न सिर्फ कुछ संदिग्धों को इलाज दिया, बल्कि फर्जी पहचान पत्र और अस्पताल रिकॉर्ड बनाने में भी मदद की। एजेंसियों को आशंका है कि इनके जरिए आतंकियों की मूवमेंट को कवर देने की कोशिश की गई थी।
पिछले 48 घंटों में दिल्ली, यूपी और हरियाणा में कई ठिकानों पर छापे मारे गए, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ संदिग्ध दवाइयां बरामद हुई हैं। अधिकारी कह रहे हैं कि डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां अब इस बात की तह में जा रही हैं कि मेडिकल नेटवर्क का किस हद तक इस्तेमाल किया गया और क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले दिनों में केस से जुड़े और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियों की संभावना है।
दिल्ली ब्लास्ट केस की गंभीरता को देखते हुए पूरे एनसीआर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि गुप्तचर विभाग सभी संभावित लिंक की गहराई से जांच कर रहा है।


