भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है — अब सभी बैंकों को आधिकारिक वेबसाइट के लिए विशेष .bank.in डोमेन अपनाना अनिवार्य किया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य ग्राहकों के लिए आधिकारिक बैंकिंग पोर्टल की पहचान सरल बनाना और फिशिंग/स्पूफिंग जैसी नकली वेबसाइटों से सुरक्षा बढ़ाना है। Reuters+1
.bank.in क्या है और क्यों लाया गया?
.bank.in एक सुरक्षित, सीमित और केवल सत्यापित बैंकों के लिए आरक्षित डोमेन है — यानी केवल मान्यता प्राप्त बैंक ही इस डोमेन में अपना नाम पंजीकृत कर पाएँगे। ऐसे डोमेनों का उद्देश्य है कि ग्राहक URL देखकर ही पहचान लें कि वे असली बैंक की साइट पर हैं या किसी नकली पोर्टल पर। RBI ने यह पहल डिजिटल भुगतान-युग में बढ़ते साइबर धोखों और डोमेन-आधारित फिशिंग हमलों को रोकने के उद्देश्य से शुरू की। informatics.nic.in+1
कब लागू होगा — टाइमलाइन और निर्देश
RBI ने 22 अप्रैल 2025 की सर्कुलर में बैंकों को कहा कि वे अपनी वेबसाइटों को .bank.in में माइग्रेट करें और यह प्रक्रिया सुनिश्चित तौर पर 31 अक्टूबर 2025 तक पूरी कर लें। IDRBT (Institute for Development and Research in Banking Technology) को इस डोमेन के रजिस्ट्रार के रूप में चुना गया है और पंजीकरण-प्रक्रिया के निर्देश भी जारी किए गए हैं। gujfed.com+1
इससे ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
फिशिंग कम होगी: फ्रॉड वेबसाइटें अक्सर
.comया مشابه डोमेनों का उपयोग कर असली दिखने की कोशिश करती हैं —.bank.inजैसी सीमित श्रेणी से ग्राहकों के लिए सही साइट पहचानना आसान होगा। CyberPeaceट्रस्ट और ब्रांड सुरक्षा: ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और बैंकिंग ब्रांड को ऑनलाइन छवि की सुरक्षा मिलेगी।
सेंट्रलाइज्ड रजिस्ट्रेशन: IDRBT जैसे भरोसेमंद रजिस्ट्रार के होने से गलत या नकली पंजीकरण रोके जा सकेंगे। informatics.nic.in
बैंकों के लिए कदम और यूजर-गाइड
RBI के निर्देश के अनुसार बैंक अपनी पुरानी डोमेन को चरणबद्ध तरीके से नए .bank.in डोमेन पर रिडायरेक्ट करेंगे ताकि ग्राहक किसी तरह के व्यवधान का सामना न करें। ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने मोबाइल/ब्राउज़र में बैंकिंग साइट के बुकमार्क अपडेट कर लें और किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें — विशेषकर SMS/WhatsApp या ईमेल के जरिए आने वाले लॉगिन-लिंक पर। Vajiram & Ravi+1
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विशेषज्ञों का कहना
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम तकनीकी रूप से उपयोगी है क्योंकि एक “वेरिफाइड, कंट्रोल्ड टॉप-लेवल स्पेस” (यानी .bank.in) फ्रॉड्स के लिए बाधा बनती है — पर इसे सफल बनाने के लिए बैंकों को DNS सुरक्षा, HTTPS-HSTS, और यूज़र-एडुकेशन अभियान भी साथ में चलाने होंगे। CyberPeace
निचोड़
RBI का .bank.in मिशन डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। उपयोगकर्ताओं को भी सतर्क रहकर, ब्राउज़र बुकमार्क अपडेट करके और बैंक के आधिकारिक नोटिस पर ध्यान देकर इस संक्रमण का हिस्सा बनना होगा। जो बैंक अभी तक माइग्रेशन नहीं कर चुके हैं, उन्हें नियत तारीख तक कदम उठाने की सलाह दी जा रही है ताकि ग्राहक सुरक्षित डिजिटल सेवा का लाभ बिना रुकावट के उठा सकें।


