सिख इतिहास से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक क्षण उस समय देखने को मिला, जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 300 वर्ष पुराने पवित्र जूते (चरन पादुका) आखिरकार पटना साहिब लौट आए। यह वही पावन स्थान है जहां दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। इस धरोहर को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बड़े श्रद्धा और सम्मान के साथ सिख संगत को समर्पित किया।पूरा कार्यक्रम धार्मिक उत्साह और भक्ति से भरा हुआ था। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और गुरु महाराज के इस प्रतीक स्वरूप को नमन किया।
हरदीप सिंह पुरी ने किया प्रतीकात्मक हस्तांतरण
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी विशेष रूप से इस समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक धरोहर नहीं, बल्कि गुरु महाराज की आत्मा का प्रतीक है, जो हमें सेवा, त्याग और मानवता का संदेश देती है।” पुरी ने श्रद्धा के साथ पवित्र जूतों को तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के जत्थेदार को सौंपा। इसके बाद विशेष कीर्तन और अरदास का आयोजन किया गया, जिसमें सिख संगत ने गुरु महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कहां से लाए गए गुरु जी के पवित्र जूते
जानकारी के अनुसार, गुरु गोबिंद सिंह जी के ये जूते महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त श्री हज़ूर साहिब से लाए गए हैं। वहां यह पावन जोड़ी तीन सदियों से सुरक्षित रखी गई थी। श्री हज़ूर साहिब प्रबंधक समिति ने इन जूतों को पटना साहिब भेजने का निर्णय लिया ताकि सिख संगत गुरु जी के जन्मस्थल पर इस धरोहर के दर्शन कर सके। यह जोड़ी खास लकड़ी और चमड़े से बनी है, जिस पर गुरु महाराज के समय की पारंपरिक कारीगरी दिखाई देती है। इसे विशेष सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पटना लाया गया।
पटना साहिब में हुआ भव्य स्वागत
जैसे ही जूते पटना पहुंचे, पूरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब परिसर “वाहे गुरु” के जयकारों से गूंज उठा। नगर कीर्तन का आयोजन किया गया जिसमें निहंग सिखों ने तलवारबाज़ी और पारंपरिक गातका प्रदर्शन किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हज़ूरी में जूतों को रखा गया और विशेष अकंड पाठ साहिब की शुरुआत की गई। इस अवसर पर देशभर से आए सिख श्रद्धालुओं के अलावा, कई धार्मिक संगठनों, सांसदों और राज्य के मंत्रियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इतिहास से जुड़ी धरोहर का महत्व
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 1666 में पटना साहिब में हुआ था। वे सिख धर्म के दसवें गुरु थे और उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उनके ये जूते उनके दैनिक जीवन और यात्राओं के दौरान उपयोग में लाए गए माने जाते हैं। सिख परंपरा में यह जूते गुरु के आशीर्वाद और पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि जब गुरु जी नांदेड़ पहुंचे थे, तब उनके साथ ये जूते थे। बाद में इन्हें वहां संरक्षित कर धार्मिक धरोहर के रूप में रखा गया।
सिख संगत में उमड़ा उत्साह और आस्था
पटना साहिब में गुरु जी के पवित्र जूतों के दर्शन के लिए देशभर और विदेशों से श्रद्धालु पहुंचे। कई लोगों ने इस क्षण को “आध्यात्मिक पुनर्मिलन” बताया। श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे और गुरु जी की इस धरोहर के आगे माथा टेका। पटना के सिख समुदाय ने बताया कि यह अवसर सदियों में एक बार मिलने वाला सौभाग्य है। इस पवित्र धरोहर के आगमन से पूरे प्रदेश में भक्ति और उत्साह का माहौल बन गया है।
सरकार और सिख प्रबंधक समितियों का संयुक्त प्रयास
इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, तख्त श्री हज़ूर साहिब और तख्त श्री हरिमंदिर पटना साहिब प्रबंधन समितियों का बड़ा योगदान रहा। सुरक्षा, संरक्षण और यात्रा के दौरान आधुनिक तकनीक से निगरानी की गई ताकि धरोहर को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। हरदीप पुरी ने कहा कि यह सरकार का दायित्व है कि गुरु परंपरा और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में कोई कमी न रहे।


