राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने आरएसएस पर दोबारा बैन लगाने की बात कही, ने सियासी हलचल मचा दी है। इस बयान पर संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब दिया है कि “आरएसएस देश विरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संगठन है।”
खरगे के इस बयान ने विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच एक नई बहस छेड़ दी है — क्या देश में फिर से संघ पर प्रतिबंध लगाने जैसी स्थिति बन सकती है?
खरगे का बयान: “संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी कदम”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सभा में कहा कि,
“आरएसएस ने हमेशा विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया है। अगर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करनी है, तो इस संगठन पर बैन लगाने पर विचार करना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि देश में बढ़ती नफरत और धार्मिक ध्रुवीकरण के पीछे संघ की विचारधारा जिम्मेदार है। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि संघ और भाजपा मिलकर संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। खरगे के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बयान देश के करोड़ों स्वयंसेवकों का अपमान है, जो समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण में लगे हुए हैं।
संघ का जवाब: “देशभक्त संगठन को बदनाम करने की राजनीति”
खरगे के बयान के बाद आरएसएस ने आधिकारिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान न केवल आधारहीन है, बल्कि कांग्रेस की मानसिकता को भी दर्शाता है।
संघ के वरिष्ठ प्रचारक अरुण कुमार ने कहा,
“RSS वह संगठन है जो देश के लिए काम करता है। हमने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम किया है। जो लोग हमें बैन की धमकी दे रहे हैं, वे असल में राष्ट्रवाद से डरते हैं।”
संघ ने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब संघ पर प्रतिबंध लगाया गया, संगठन और मजबूत होकर उभरा।
इतिहास में तीन बार लग चुका है बैन
आरएसएस पर प्रतिबंध का मुद्दा नया नहीं है। अब तक संघ पर तीन बार बैन लगाया जा चुका है:
1. 1948 में, महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर पहली बार प्रतिबंध लगा।
2. 1975 में, आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संघ पर फिर से बैन लगाया।
3. 1992 में, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद संघ पर तीसरी बार प्रतिबंध लगा
हर बार संघ ने कानूनी तरीके से अपनी सफाई दी और बैन हटा लिया गया। यही वजह है कि आज संगठन देश के सबसे बड़े सामाजिक नेटवर्क में से एक है।
भाजपा का पलटवार: “कांग्रेस अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाना चाहती है”
भाजपा नेताओं ने खरगे के बयान को राजनीतिक हताशा का परिणाम बताया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा,
“जब कांग्रेस को कोई मुद्दा नहीं मिलता, तो वह संघ और सावरकर पर बयानबाजी शुरू कर देती है। खरगे जी को देश के विकास में संघ के योगदान की जानकारी नहीं है।”
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस की यह रणनीति ध्रुवीकरण फैलाने और जनता का ध्यान भटकाने की है, लेकिन लोग अब ऐसे बयानों से प्रभावित नहीं होंगे।
विश्लेषण: क्यों बार-बार उठता है RSS पर बैन लगाने का मुद्दा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस पर बैन लगाने की बात कांग्रेस के वैचारिक विरोध का हिस्सा है। संघ की विचारधारा हिंदुत्व पर आधारित है, जबकि कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता का झंडा उठाती है। यही वजह है कि दोनों के बीच वैचारिक टकराव दशकों पुराना है।कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि खरगे का यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, ताकि सेक्युलर वोट बैंक को मजबूत किया जा सके। दूसरी ओर, भाजपा और संघ इस मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकते हैं, यह दिखाकर कि विपक्ष राष्ट्रवादी संगठनों को कमजोर करना चाहता है।
संघ का रुख: “हम राजनीति नहीं, समाजसेवा करते हैं”
संघ ने यह भी दोहराया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से ऊपर एक सामाजिक संगठन है। उनका उद्देश्य समाज में एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। संघ नेताओं ने कहा कि वे राजनीतिक विवादों में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन अगर कोई संगठन या नेता उनके खिलाफ गलत धारणा फैलाएगा, तो जवाब जरूर देंगे।


