छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कांकेर जिले में रविवार को सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली। 21 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन नक्सलियों ने कुल 18 आधुनिक हथियार, जिनमें AK-47, इंसास और SLR राइफलें शामिल हैं, पुलिस के हवाले किए। ये सभी माओवादी नॉर्थ सब जोनल ब्यूरो (North Sub Zonal Bureau) के तहत सक्रिय थे और लंबे समय से जंगलों में हिंसक गतिविधियों में शामिल थे।
सरेंडर में शामिल नक्सलियों की पृष्ठभूमि
कांकेर पुलिस के मुताबिक, सरेंडर करने वाले माओवादी संगठन के पुराने और प्रशिक्षित सदस्य थे। इनमें से कुछ पर लाखों रुपये के इनाम भी घोषित थे। ये नक्सली क्षेत्र में IED ब्लास्ट, पुलिस बलों पर हमले और ग्रामीणों से वसूली जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।
इनमें प्रमुख नाम हैं:
- मिलिंद उर्फ रमेश, जो नॉर्थ सब जोनल ब्यूरो में डिप्टी कमांडर था।
- सविता उर्फ कमला, महिला नक्सली लीडर जिसने कई भर्ती अभियानों का नेतृत्व किया।
- भास्कर और देवदास, जो लंबे समय से कांकेर-सुकमा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय थे।
- सभी नक्सलियों ने कहा कि अब वे मुख्यधारा में लौटकर समाज की सेवा करना चाहते हैं।
क्यों किया नक्सलियों नेआत्मसमर्पण?
सकिया नक्सलियों नेरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया कि जंगलों में लगातार सुरक्षा बलों की बढ़ती कार्रवाई, भारी दबाव, और शीर्ष नेताओं का शोषण उनके निर्णय की प्रमुख वजहें थीं। इसके अलावा, सरकार द्वारा चलाए जा रहे “नक्सल पुनर्वास योजना” (Surrender and Rehabilitation Policy) ने भी उन्हें प्रेरित किया। राज्य सरकार नक्सलियों को सरेंडर के बाद रोजगार, शिक्षा, और आवास जैसी सुविधाएं देने का आश्वासन देती है। यह नीति पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रभावी साबित हुई है।
सरकार और पुलिस का बयान
कांकेर के एसपी ने कहा कि यह सरेंडर ऑपरेशन लॉन्ग-टर्म इंटेलिजेंस और लगातार संवाद प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से इन नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया।
राज्य के गृह मंत्री ने कहा,
यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब ये लोग समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आने वाले महीनों में और भी नक्सली हिंसा छोड़ें।”
हथियारों की लिस्ट जो सरेंडर के साथ जमा हुई
सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने कुल 18 हथियार सौंपे, जिनमें शामिल हैं:
AK-47 राइफल – 3
INSAS राइफल – 4
SLR राइफल – 2
.303 राइफल – 5
देशी बंदूकें और पिस्टल – 4
इसके अलावा गोला-बारूद, वायरलेस सेट, यूनिफॉर्म और डेटोनेटर भी पुलिस ने बरामद किए हैं।
क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में कदम
कांकेर, बस्तर और सुकमा जैसे इलाकों में नक्सली गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती रही हैं। इस सरेंडर को विशेषज्ञ “शांति प्रक्रिया की दिशा में अहम कदम” बता रहे हैं। उनका मानना है कि जब स्थानीय माओवादी खुद हथियार डालने लगते हैं, तो इससे बाकी नक्सलियों का भी मनोबल टूटता है। राज्य सरकार ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए रिहैबिलिटेशन कैंप तैयार किया है, जहां उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता, स्किल ट्रेनिंग और रोज़गार के अवसर दिए जाएंगे।


